धर्म / ज्योतिष

बुध प्रदोष व्रत से होगी हर मनोमाकना पूरी, भगवान आशुतोष देंगे ये वरदान

वाराणसी। भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में भगवान शिव की महिमा अनंत है। प्रदोष व्रत के उपाय से देवता भगवान शिव ही हैं भगवान शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्ति के लिए शिव पुराण में विधिवत तत्वों का उल्लेख मिलता है,जिसमें प्रदोष व्रत अत्यंत प्रभावशाली तथा शीघ्र फलदाई माना गया है। प्रख्यात ज्योतिषविद  विमल जैन ने बताया यह प्रदोष व्रत प्रत्येक मास में दो बार आता है शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन। साल का पहला प्रदोष व्रत इस बार बुधवार 8 जनवरी को रखा जाएगा। जिसमें भगवान आशुतोष की पूजा-अर्चना करने से व्रती को सुख सौभाग्य की प्राप्ति होगी।इस बार यह प्रदोष व्रत 8 जनवरी बुधवार को रखा जाएगा पौष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 जनवरी मंगलवार की अर्धरात्रि के पश्चात 4:15 पर यह तिथि लगेगी। जो अगले दिन 8 जनवरी बुधवार की अर्धरात्रि के पश्चात 3:44 तक रहेगी, जिसके फलस्वरूप प्रदोष व्रत 8 जनवरी बुधवार को रखा जाएगा। 

वार (दिनों) के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ :
ज्योतिषाविद विमल जैन ने बताया कि प्रत्येक दिन के प्रदोष व्रत का अलग-अलग प्रभाव है, जैसे रवि प्रदोष-आयु एवं आरोग्य लाभ के लिए। सोम प्रदोष-शांति एवं रक्षा एवं प्रदूषण से मुक्ति के लिए। बुध प्रदोष-मनोकामना की पूर्ति के लिए। गुरु प्रदोष-विजय प्राप्ति के लिए। शुक्र प्रदोष -आरोग्य सौभाग्य एवं मनोकामना की पूर्ति हेतु। शनि प्रदोष -पुत्र सुख की प्राप्ति मनोरथ की पूर्ति के लिए की जाती है। 11 प्रदोष व्रत अभीष्ट की पूर्ति हेतु होने तक प्रदोष व्रत रखने की धार्मिक मान्यता है।

ऐसे रखें प्रदोष व्रत :
ज्योतिषचार्य विमल जैन ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रातकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान ध्यान करना चाहिए। इसके पश्चात अपने दाहिने हाथ में जल लेकर प्रदोष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिन भर निराहार रहकर स्नान करके प्रदोष काल में भगवान शिव जी की विधि विधान पूर्वक पूजा करना चाहिए। प्रदोष व्रत से सभी मनोकामना की पूर्ति के साथ-साथ जीवन में सुख समृद्धि व खुशहाली मिलती है। जीवन के समस्त दोषों का शमन हो जाए है यह व्रत महिला एवं पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फलदाई है।

कैसे करें व्रत और पूजा :
अश्विन माह के शुक्लपक्ष को पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह व्रत निर्जल यानी बिना पानी के किया जाता है। प्रदोष व्रत की विशेष पूजा शाम को की जाती है। इसलिए शाम को सूर्य अस्त होने से पहले एक बार फिर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ़ सफेद रंग के वस्त्र पहन कर पूर्व दिशा में मुंह कर भगवान की पूजा की जाती है।

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