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CAA की हकीकत : जानें क्या है नया नागरिकता कानून?

वाराणसी। नागरिकता कानून को लेकर जहां एक ओर देश में हिंसात्मक घटनाएं की जा रहीं हैं, तो वहीं अब विपक्ष भी इसको लेकर सड़कों पर उतरता नजर आ रहा है। यूपी में सपा और कांग्रेस इसको लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है और इन सब के बीच एक मुद्दा जो सामने आ रहा है, वह यह कि इस काूनन में एक विशेष समुदाय को जगह नहीं दी गई है। हालांकि यह कुछ लोगों द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। इस कानून से देश के भीतर रहने वाले उस विशेष समुदाय को कहीं से कोई भी समस्या नहीं होगी।

आइये जानते हैं क्या है इस कानून की मुख्य बातें:
12 दिसम्बर 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नागरिकता संशोधन बिल को कानून का दर्जा मिला गया। इसमें खास बात यह है कि इसके माध्यम से भारत के तीन पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आये 6 समुदाय के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी।

कौन हैं ये 6 समुदाय के लोग
जिस बात को लेकर उक्त विशेष समुदाय में खासा आक्रोश है, वह यह है कि इन 6 समुदाय के शरणार्थियों में हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई ही शामिल है। इसमें उक्त विशेष समुदाय को शामिल नहीं किया गया है।

बता दें कि नागरिकता के लिए जो ‘कट आॅफ डेट’ है, वह 31 दिसम्बर 2014 तय की गई है। यानि साल 2015 के पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भागकर भारत आये हैं, ऐसे 6 समुदाय के लोग नागरिकता हासिल कर सकेंगे।

क्या था पूर्व में नागरिकता के लिए कानून
भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए इस कानून के पहले जो नियम था, वह यह था कि यहां जन्म लेने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक है या फिर जो व्यक्ति 11 साल तक देश में रहा है, वह भारत की नागरिकता पाने के लिए आवेदन कर सकता है। इस कानून में यह अवधि भी घटाकर 6 साल कर दी गई है, जो कहीं न कहीं सभी के हित में हैं।

इन पड़ोसी देशों पर नहीं लागू है कानून
नागरिकता कानून भारत के हर पड़ोसी देश के लिए लागू नहीं होता है। यानि म्यांमार और श्रीलंका से धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में आने वाले शरणार्थियों पर यह कानून लागू नहीं होता है।

अब ऐसे में इस कानून को लेकर जो विरोध सामने आ रहा है, वह विरोध इस बात का है कि इसमें दूसरे देश से आये एक विशेष समुदाय शरणार्थियों को शामिल नहीं किया गया है। जबकि देश के भीतर रहने वाले यानि जो इस देश में जन्म लिए लोग है, चाहे वह किसी भी धर्म के हैं, वह काूननन भारत के नागरिक हैं।

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