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उन्नाव गैंगरेप काण्ड में MLA कुलदीप सिंह सेंगर दोषी करार, आरोपी शशि सिंह हुए बरी 

रिपोर्ट- सौम्या

नई दिल्ली। उन्नाव के बहुचर्चित अपहरण और गैंगरेप कांड पर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए बीजेपी के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार दिया है। वहीं एक अन्य सह आरोपी शशि सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया है । गौरतलब है कि 2017 में पीड़िता के साथ दुष्कर्म हुआ था और उस समय पीड़िता नाबालिग थी। सीबीआई को भी कोर्ट ने देर से चार्जशीट दाखिल करने को लेकर फटकार लगाई है। 19 दिसंबर को सजा पर फैसला आ सकता है। 

बता दें कि बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सेंगर और उनके भाइयों पर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी, जिसमें एसआईटी ने विधायक के खिलाफ रेप के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही। अदालत के आदेश पर इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। वहीं कोर्ट ने देर से करवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विधायक पर 4 जून 2017 को रेप का आरोप लगा था और  SIT की रिपोर्ट पर 11 अप्रैल 2018 को FIR दर्ज की गई। इस मामले में  किरकिरी होने के बाद योगी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने विधायक को गिरफ्तार कर तहकीकात शुरू की। जिस पर आज कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार दे दिया। अब देखना ये होगा कि 19 दिसंबर को  दोषी करार दिए गए सेंगर को क्या सजा सुनाती है। एक नजर डालते हैं उन्नाव केस पर कब और क्या-क्या हुआ –

उन्नाव केस : 11 जून 2017 से अब तक क्या क्या हुआ?

11 जून 2017 को परिवार वालों ने पीड़िता के गायब होने पर आरोपी शुभम, अवधेश पर केस दर्ज किया। 21 जून 2017 को पीड़िता पुलिस को मिली, जिसके बाद 22 जून को मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता ने बयान दिया जिसके बाद विधायक समर्थक बताए जा रहे तीनों युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में 1 जुलाई 2017 को चार्जशीट दायर कर दी गयी। 22 जुलाई 2017 को पीड़िता ने पीएम और सीएम को चिट्ठी लिखी, जिसमें कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाया। 30 अक्टूबर 2017 को विधायक समर्थकों ने पीड़िता के परिवार पर मानहानि का केस किया। 11 नवंबर 2017 को  पीड़िता के चाचा पर भी मानहानि का केस किया गया। वहीं 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई और गुर्गों पर पीड़िता के घर में घुसकर पिता की पिटाई का आरोप लगाया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्रोग्रेस रिपोर्ट देने को कहा। 5 अप्रैल 2018 को आर्म्स एक्ट में पीड़िता के पिता को पुलिस ने गिरफ्तार कर 14 दिन की हिरासत में भेजा। जहां 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत हो गयी। 12 अप्रैल 2018 को केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश मंजूर करते हुए सीबीआई जांच को मंजूरी दी, जिसके बाद सीबीआई ने देर रात विधायक को हिरासत में लिया।

वहीं 15 अप्रैल 2018 को पीड़ित परिवार ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थकों से जान का खतरा बताया। चाचा ने कहा, एक भतीजा पिछले चार-पांच दिन से लापता। 17 अप्रैल 2018 को आरोपी विधायक के खिलाफ सीबीआई ने चौथी एफआईआर दर्ज की, जज के सामने बंद कमरे में पीड़िता का बयान दर्ज हुआ। 18 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता के खिलाफ सीबीआई को फ़र्ज़ी  एफआईआर होने के सबूत मिलें। 1 मई 2018 को पीड़िता के परिवार वाले पुलिस पर सेंगर को बचाने की नीयत से शिकायत बदलने का आरोप लगाया। 2 मई 2018 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीबीआई ने सीलबंद लिफाफे में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की। जिसके बाद 8 मई  2018 को सेंगर को उन्नाव से सीतापुर जेल भेज दिया गया। 17 मई 2018 को  सीबीआई ने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दो पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया। 21 मई 2018 को आर्म्स एक्ट के तहत पीड़िता के पिता को झूठे केस में फंसाने में  सेंगर को आरोपी पाया गया। 28 जुलाई 2019 को पीड़िता की कार दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें उसकी हालत गंभीर थी वहीं चाची और मौसी की मौत हो गयी।

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