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AGRICULTURE: किसानों के लिए स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति हो रही कारगर साबित 

वाराणसी। कृषि उद्योग एवं पेयजल के आपूर्ति के लिए पानी की उपयोगिता बढ़ गई है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर पद्धति यानि कि फौव्वारा विधि से फसलों की सिंचाई डार्क,सेमी डार्क क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ी उपयोगी सिद्ध हो रही है। 

बता दें कि सिंचाई की विभिन्न विधियों में स्प्रिंकलर पद्धति एक ऐसी पद्धति है जिसे अपनाकर जल प्रबंधन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा रहा है। फौव्वारा विधि में प्लास्टिक अथवा अल्युमिनियम पाइपों को खेत में जाल की तरह बिछाकर ऊंचे-नीचे, रेतीले, पहाड़ी व पथरीली किसी भी प्रकार की जमीन पर सहजता से सिंचाई की जा सकती है। क्योंकि इस विधि से सिंचाई करते समय जल बाहर नहीं जाता है। बोई गई फसल और भूमि की नमी बरकरार रहती है।

फौव्वारा विधि से सिंचाई करने पर क्यारियों के माध्यम से की गई सिंचाई की अपेक्षा 30 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इस बचे हुए पानी से किसान अपनी फसल के क्षेत्र को बढ़ा सकते हैं। भूमिगत जल स्तर को सुदृढ़ करने में भी यह विधि सहायक है। इससे फसल सघनता में वृद्धि तथा उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है। सरकार द्वारा स्प्रिंकलर पद्धति से सिंचाई करने के लिए स्प्रिंकलर सेट क्रय हेतु लघु एवं सीमान्त किसानों को 90 प्रतिशत तथा सामान्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान दे रही है। किसानों द्वारा सरकार की इसनीति का लाभ लिया जा रहा है और वे सिंचाई की इस पद्धति को अपनाकर अपनी फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर रहे हैं।

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