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करोड़ों के घाटे में चल रही चीनी मिल, मंत्री ने शुरू किया गन्ना पेराई सत्र

रिपोर्ट- महितोष मिश्र

मऊ। यूपी के जनपद मऊ में घोसी तहसील स्थित घोसी सहकारी चीनी मिल करोड़ों रुपए के घाटे में चल रही है। करोड़ों रुपए के घाटे में चलने के बावजूद भी एक बार फिर घोसी चीनी मिल में गन्ना पेराई सत्र का शुभारंभ सोमवार को किया गया। इस मौके पर डीएम, प्रभारी मंत्री सुरेश पासी के साथ विधायक विजय राजभर मौजूद रहे।

बता दें कि वर्षों से लगातार घाटे में चल रही चीनी मिल को इस बार मुनाफा दिलाने के लिए प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश पासी ने आश्वासन दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश की जो भी चीनी मिल घाटे में चल रही हैं। उससे मुनाफा कमाने के लिए हमारी सरकार एथेनॉल प्लांट के साथ-साथ बिजली उत्पादन का भी काम करने की तैयारी कर रही है, जिसके माध्यम से हम लोग घोसी चीनी मिल के साथ ही प्रदेश की दूसरी चीनी मिलों में जो घाटा हुआ है उसको दूर करने का काम करेंगे।

चीनी मिल में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि पिछले 6 महीने से वेतन समय से नहीं मिला है। इसकी वजह से उन्हें तमाम तरह की दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। बता दें कि चीनी मिल 2 अरब 39 लाख के घाटे में चल रही है। चीनी मिल के लगातार घाटे में चलने के वजह से कर्मचारियों का समय से भुगतान नहीं हो पाता है। साथ ही किसानों को गन्ने का भी भुगतान समय से नहीं हो पा रहा। इसकी वजह से किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश भर की सभी चीनी मिलें घाटे में चल रही थी। इसकी वजह से यह समस्या चली आ रही है। क्योंकि पिछली सरकारों ने चीनी मिल और गन्ना किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया, इस वजह से यह समस्या बनी हुई है। सरकार के ढाई वर्ष पूरे हो गये हैं और हम लोगों ने ढाई वर्षो के दौरान किसानों के गन्ना मूल्य का अधिक से अधिक भुगतान करने का काम किया है। आने वाले समय में चीनी मिल को मुनाफे तब्दील करने का काम हमारी सरकार के द्वारा किया जा रहा है।

इलाके के स्थानीय निवासी अब्दुल कयूम अंसारी ने कहा कि चीनी मिल की स्थिति बदहाल हो चुकी है। सरकार चीनी मिल की तरफ कोई ध्यान नहीं देती है। इसकी वजह से गन्ना किसान और चीनी मिल के कर्मचारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं इलाके के दूसरे लोग शिवाकांत का कहना है कि चीनी में करीब दो अरब रुपए के घाटे में चल रही है। उसके बावजूद भी सरकार कोई ज्यादा ध्यान नहीं देती है। इसकी वजह से यह परेशानी सामने आती है।

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