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1911 में आज के दिन ही पहली बार गाया गया था राष्ट्रगान

 रिपोर्ट: किरन

 वाराणसी।  भारत के एक ऐसे राष्ट्रकवि, साहित्यकार जिन्होंने अपनी लेखनी के बदौलत विश्व के सबसे बड़े पुरस्कारों में से एक नोबल पुरस्कार पाया। यह भारत में ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में पहले व्यक्ति थे जिन्हें यह पुरस्कार मिला। इनकी कृति गीतांजली के लिए 1913 में साहित्य के नोबल पुरस्कार से इन्हें सम्मानित किया गया था इन्होंने ही हमारे देश के राष्ट्रगान को लिखा था। कांग्रेस के कलकत्ता ​अधिवेशन में आज ही के दिन यानि 27 दिसम्बर 1911 को पहली बार राष्ट्रगान गाया गया था। भारतीय संविधान सभा ने हमारे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को 24 जनवरी 1950 को अपनाया था

कितने समय में गाया जाता है राष्ट्रगान 

राष्ट्रगान को गाने में कुल 52 सेकेंड लगते है। कुछ मौकों पर इसे संक्षिप्त रूप में भी गाया जाता है। इसमें पहली और आखिरी पंक्तियां ही बोली जाती हैं जिसमें केवल 20 सेकेंड का समय लगता है। यह मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया था। भारत के राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के अलावा बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ की रचना भी टैगोर ने ही की। राष्ट्रगान के कुछ अंशों का मतलब​ होता है कि भारत के लोग, यहां की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता मानती है। हे अधिनायक आप ही भारत के भाग्य के विधाता ​है। इसके अर्थ के कारण ही इसे राष्ट्रगान बनाया गया।

इन अवसरों पर गाते है राष्ट्रगान

राष्ट्रीय ध्वज को परेड में जब लाया जाए।
. परेड के समय।
. जब रेजीमेंट के रंग प्रस्तुत किए जाए।
. ऑल इंडिया रेडियो पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के संबोधन से पहले और उसके बाद में।
. नौसेना के रंगों को फहराने के लिए।

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