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जानें क्या है मिशन दिसम्बर, चला रहा ये पुलिसवाला

रिपोर्ट – महितोष मिश्र

मऊ। जब पुलिस महकमे की बात होती है तो हमारे मन में उनको लेकर के नकारात्मक विचार आते है और हमें लगता है कि वह हमेशा आमजन को परेशान करते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे इतर होती है। पुलिसकर्मी भी संवेदनशील होते हैं और वह समाज के लोगों की मदद करते हैं। समाज में एक अलग मिशाल पेश करते हैं ऐसा ही एक मामला मऊ जनपद में भी देखने को मिला है।

जी हां, इन दिनों यूपी के जनपद मऊ में एक पुलिसकर्मी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल जिले के थाना हलधरपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत सिपाही शशिकांत वर्मा ‘मिशन दिसम्बर’ चला रहे हैं। इसके तहत वो स्टेशन और आसपास के इलाकों में गरीब व असहाय और जरूरतमंदों को कंबल वितरित कर रहे हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान शशिकांत वर्मा ने बताया कि पुलिस विभाग में नौकरी करने से पहले वह समाजकार्य के क्षेत्र में काम करते थे। वो मऊ जिले में तीन साल से पोस्टेड है। पिछले साल भी उन्होंने ‘मिशन जनवरी’ चलाया था, जिसके तहत गरीबों को वस्त्र कंबल वितरित किया गया। शशिकांत वर्मा ने बताया कि पिछले साल ठंड में अपने घर से आ रहा था, तो उस समय मैंने एक गरीब को देखा वह नंगे पैर था और ठंड की वजह से पैर घिसटकर चल रहा था। तब मुझे उसके दर्द का एहसास हुआ और मैंने अपना जूता उस गरीब को पहना दिया और अपने गंतव्य तक पैदल गया। यहीं सब बातों को सोचकर मैंने पिछले साल मिशन जनवरी चलाया था और इस साल लगभग 30 गरीब और जरूरतमंदों को ठंड के कपड़े और कंबल बांटे थे।

सिपाही शशिकांत वर्मा ने बताया कि इस कार्य के लिए मैंने अपने बोनस का पैसा लगाया है। उनकी इच्छा है कि दूसरे लोग भी प्रेरित हो और समाज सेवा का काम करें। पुलिस विभाग में नौकरी करने से पहले भी वह पॉलिथीन उन्मूलन, एचआईवी एड्स जागरूकता, स्वच्छता अभियान जैसे समाजसेवा का कार्य करते थे। ऐसे कार्यों के लिए मैंने अपने गांव में एक यूथ ऑर्गेनाइजेशन भी बनाया था। यह सब काम मुझे बहुत अच्छे लगते थे। पुलिस की नौकरी में आने के बाद अब कुछ पैसे इकट्ठा हो जाते हैं, जिससे मैं जो काम करना चाहता हूं उसमें लगा हुआ हूं।

दूसरे लोगों को संदेश देते हुए सिपाही ने कहा कि कुछ लोग पैसे से नहीं बल्कि अपनी सोच से गरीब होते हैं। किताबों में तो सब पढ़ते हैं की गरीबों और असहायों की मदद करनी चाहिए। ऐसे विचारों को पढ़कर उन पर चलना भी चाहिए तभी बदलाव आ सकता है। दूसरे लोगों को भी यथासंभव गरीबों की मदद करनी चाहिए।

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